13 अक्तूबर 2014
कुछ पुरस्कार सराहना के लिए ही नहीं, वास्तविक भी होते हैं

यह गर्व की बात है कि भारत का नाम एक बार फिर से सम्मानित नोबल पुरस्कार विजेताओं की फेहरिस्त में शुमार है। व्यक्तिगत लिहाज से मदर टेरेसा ने 1979 में इसे प्राप्त किया था। अब यह कारनामा एक बाल अधिकार कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी ने कर दिखाया है जो नॉर्वे स्थित नोबल पुरस्कार समिति की पसंद बन कर उभरे।

8 अक्तूबर 2014
टीआरपी की होड़ करा सकता है भारत-पाक में जंग

मोदी सरकार ने संप्रग 2 से विरासत में प्राप्त खराब आर्थिक स्थिति से उबरने, भारत को एक निवेश गंतव्य के रूप में विश्व के ध्यान केंद्र में लाने की कोशिश में अभी अभी अपने पांव जमाना शुरू ही किया है कि एक युद्ध जैसे हालात का खतरा मंडराने लगा है जो देश को एक अभूतपूर्व आर्थिक विषाद में डाल सकता है। अगर युद्ध का साया मंडराता है तो क्या कोई महसूस करता है कि इससे सबसे ज्यादा प्रभावित कौन होंगे- भारत के गरीब।

24 सितम्बर 2014
हिन्दी-चीनी भाई भाई में है ‘ भरोसे की चीनी कम‘

दृश्य 1: चीन के राष्ट्पति जी जिनपिंग ने भारत की अपनी राजकीय यात्रा तुरंत समाप्त की है और पीपुल्स लिबरेशन आर्मी को युद्व के लिए तैयार रहने को कह दिया है, लेकिन साथ में वह यह भी कहते हैं कि भारत को संदेह करने की जरूरत नहीं है जबकि पूर्वी लद्वाख के चुमार में भारत और चीन की सेनाएं बेहद तनातनी के माहौल में एक दूसरे के खिलाफ जुटी हुई हैं।

2 सितम्बर 2014
मोदी ने जापान में बुलेट ट्रेन, स्मार्ट सिटी पर निवेश के लिए बनाया माहौल

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सूचना और ढांचागत प्रौद्योगिकी सुविधाओं से लैस उन्नत शहरों के विजन ने आकार लेना शुरू कर दिया है। शहरी विकास मंत्रालय ने इसके लिए जगहों की पहचान कर ली है।

12 सितम्बर 2014
कमजोर स्वास्थ्य सेवाएं कर देंगी जीडीपी लक्ष्य को दूर

तेजी से बढती जनसंख्या के बोझ, गरीबी और कमजोर बुनियादी ढांचे के कारण भारत के सामने शायद दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य सेवा चुनौती है

3 अक्तूबर, 2014
समृद्धि की ओर ले जाता मोदी का स्वच्छ भारत अभियान

4 फरवरी 1916। महात्मा गांधी ने काशी विश्वनाथ मंदिर की यात्रा की और इस दौरान उन्हें लगातार गंदगी का सामना करना पड़ा। उन्होंने बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के उद्घाटन के अवसर पर भी भाषण दिया जहां वह इसके संस्थापक मदन मोहन मालवीय के आमंत्रण पर आए थे। चूंकि वह इस पवित्र नगरी में अपने अनुभव से खुश नहीं थे, इसलिए उन्होंने कहा‘ क्या यह महान मंदिर हमारे अपने चरित्र का प्रतिबिंब नहीं है?