टेक्नोलॉजी

7 अक्तूबर, 2014
हैमलेट, हैदर और नेशनल इन्फार्मेटिक्स सेंटर

नेशनल इन्फार्मेटिक्स सेंटर यानी एनआईसी के संदर्भ में ‘हो या न हो‘ का यक्ष प्रश्न लंबे समय से उठाया जाता रहा है। जब इलेक्ट्रानिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग यानी डेयटी के सचिव यह कहते हैं कि एनआईसी के पास प्रधानमंत्री द्वारा परिकल्पित ‘डिजिटल इंडिया‘ को क्रियान्वित करने की क्षमता का एक अंश भी नहीं है तो इस वक्तव्य को या तो एनआईसी की एक आलोचना या फिर एनआईसी को जीवंत बनाने की एक योजना शुरू करने की पूर्व-भूमिका के रूप में देखा जा सकता है जो एनआईसी को एक ऐसे मजबूत सूचना प्रणाली संगठन के रूप में बदल देने में मदद करे जिसपर कोई भी देश गर्व महसूस करे।

28 अगस्त 2014
मोदी की ‘डिजिटल इंडिया योजना:113,000 करोड़ रूपये की बर्बादी ?

मीडिया में डिजिटल इंडिया पर कई तरह की खबरें आ रही हैं जिनमें इसे आधी-अधूरी योजना और करदाताओं के पैसे की बर्बादी करार दिया जा रहा है। भारत की पहली राष्ट्ीय ई-गवर्नेंस योजना 2004 में शुरू हुई और फिर कपिल सिब्बल के नेतृत्व वाले संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा इसका पुर्नअवतार किया गया।

23 सितम्बर 2014
पंचायतों को शामिल किए बगैर वास्तविक डिजिटल इंडिया मुमकिन नहीं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का डिजिटल इ्रंडिया का विजन पंचायतों को शामिल किए बगैर साकार नहीं होगा। यह मानना है सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी का।