एलआईसी कर रही गरीबों के बीमा से परहेज

ज्ञानेन्द्र केशरी, कार्यकारी संपादक, इनक्लुजन

31 दिसंबर, 2013 तक, एलआईसी के पोर्टफोलियो में 53 उत्पाद थे। अब यह संख्या गिरकर लगभग 10 तक आ गई है

सरकार द्वारा संचालित लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन अर्थात एलआईसी, जो देश में दो तिहाई जीवन बीमा व्यवसाय को नियंत्रित करती है, ने प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत प्रस्तावित 30,000 जीवन बीमा की लागत का बोझ उठाने में अनिच्छा जाहिर की है।

जन धन योजना वित्तीय समावेश का सबसे महत्वाकांक्षी कदम है जो सार्वजनिक क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी के बगैर शायद ही अपेक्षित परिणाम अर्जित कर सकती है। सरकार द्वारा नियंत्रित होने के कारण इस कंपनी से उम्मीद की जाती है कि यह ज्यादा समावेशी होगी तथा गरीबों पर इसका ज्यादा ध्यान होगा। लेकिन एलआईसी जिसका भारतीय जीवन बीमा बाजार में लगभग एकाधिकार है, ऐतिहासिक रूप से ही गरीबों को बीमा सुरक्षा मुहैया कराने के विचार के प्रति अनिच्छा जाहिर करता रही है।

इसका फोकस मुख्य रूप से धनी वर्ग से अधिक से अधिक प्रीमियम लेने पर रहा है। एलआईसी के प्रॉडक्ट पोर्टफोलियो पर एक नजर डालने से स्पष्ट रूप से यह प्रदर्शित होता है कि गरीबों के लिए यह महंगा तथा उनकी पहुंच के बाहर रहा है। 31 दिसंबर, 2013 तक, एलआईसी के पोर्टफोलियो में 53 उत्पाद थे। अब यह संख्या गिरकर लगभग 10 तक आ गई है। हालांकि इसके दो प्लान समाज के कमजोर तबकों पर भी केंद्रित रहे हैं, लेकिन ऐसे उत्पादों पर इसका शायद ही कोई फोकस रहा है।

सरकारी निर्देश के तहत, एलआईसी ने 2000 के दशक के मध्य में जीवन मधुर और जीवन दीप नाम के इनडाउमेंट एश्योरेंस प्लान और जीवन मंगल नाम के टर्म एश्योरेंस प्लान जैसे सूक्ष्म बीमा उत्पादों को शुरू किया था। लेकिन इसके लिए उसका कोई फोकस नहीं था, क्योंकि ये प्लान कोई आकर्षक रिटर्न नहीं देते। जीवन बीमा व्यवसाय के मुख्य कर्ता-धर्ता एजेंट होते हैं, लेकिन उनके लिए इन सूक्ष्म बीमा उत्पादों में कोई आकर्षण नहीं था क्योंकि इनमें कमीशन उतना अच्छा नहीं था।

वित्तीय समावेश योजनाओं के प्रति एलआईसी की बेरूखी देश में बीमा पैठ के अपेक्षित प्रचार प्रसार में कमी की बड़ी वजह रही है। भारत की बीमा पैठ दुनिया में सबसे कम है। 1.25 अरब से ज्यादा भारतीयों में केवल 3.1 फीसदी ही बीमित हैं। गैर-जीवन बीमा के मामले में स्थिति और बुरी है। कुल आबादी के केवल 0.8 फीसदी के पास ही गैर-जीवन बीमा कवर है।

बीमा से वंचित एक विशाल आबादी तथा बढ़ते मध्य वर्ग को देखते हुए, भारत के बीमा उद्योग के पास विकास की प्रचुर संभावना है। इसमें कोई संदेह नहीं कि प्रधानमंत्री जन धन योजना एक महत्वाकांक्षी योजना है और यह देश में बीमा पैठ को काफी अधिक बढ़ा सकती है। इस योजना के तहत आने वाले सभी खाताधारकों को एक रूपे डेबिट कार्ड तथा 5,000 रूपये की ओवरड्ाफ्ट सुविधा के साथ 10,000 रूपये का एक दुर्घटना बीमा कवर मिलेगा। इसके लांच वाले दिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यह भी घोषणा की कि लाभार्थियों को 30,000 रूपये का एक जीवन बीमा कवर भी मुहैया कराया जाएगा।

एलआईसी को निश्चित रूप से इसमें सहयोग देना चाहिए तथा इस कार्यक्रम को सफल बनाने में अपना योगदान देना चाहिए। गरीबों को बीमा मुहैया कराने को बोझ के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। बढ़ी हुई बीमा पैठ एक तरफ कंपनी तथा पूरे उद्योग को मदद करेगी तथा दूसरी तरफ निर्धनों को गरीबी से निजात दिलाने में सहायक साबित होगी।

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