मोदी ने जापान में बुलेट ट्रेन, स्मार्ट सिटी पर निवेश के लिए बनाया माहौल

गुरशरन धन्जल, संपादक, इनक्लुजन

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी टोक्यो में निप्पों किएडांरेन-जापान के वाणिज्य एवं उद्योग चैंबर और जापान-भारत व्यवसाय सहयोग समिति द्वारा आयोजित समारोह में अपने संबोधन भाषण के दौरान

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सूचना और ढांचागत प्रौद्योगिकी सुविधाओं से लैस उन्नत शहरों के विजन ने आकार लेना शुरू कर दिया है। शहरी विकास मंत्रालय ने इसके लिए जगहों की पहचान कर ली है। संयोग की बात है कि इसी के साथ साथ जापान की उनकी पहली यात्रा का अवसर भी बना जहां वह अपनी स्मार्ट सिटी के ड्रीम प्रोजेक्ट, बुलेट ट्रेन, औद्योगिक कॉरीडोर, तकनीकी विशेषज्ञता और सबसे महत्वपूर्ण और बेहद जरूरी वित्तीय निवेश के लिए दबाव और आवश्यक माहौल बना पाने में कामयाब रहे हैं।

जहां शहरी विकास मंत्रालय ने क्रियान्वयन करने वाले 22 राज्यों को विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट यानी डीपीआर तैयार करने को कहा है, मोदी अगले पांच वर्षों के दौरान जापान से भारत के बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में 34 अरब डॉलर के निवेश के वादे पर सफलतापूर्वक दबाव डालने में सक्षम रहे हैं। इनमें स्मार्ट सिटी, बुलेट ट्रेन, मेट्रो ट्रेन और औद्योगिक गलियारों का विकास शामिल है। यह 2000-13 के दौरान हुए कुल 15.35 अरब डॉलर के जापानी निवेश के दोगुने से भी अधिक है जिसमें ढांचागत क्षेत्र एक छोटा सा हिस्सा रहा है।

बैंगलोर-चेन्नई कॉरीडोर के साथ तीन नगरों-पोन्नेरी, कृष्णापटनम और तुमकुर के लिए मास्टर प्लान तैयार हैं। अमृतसर-कोलकाता और चेन्नई-विशाखापटनम की संभावित स्मार्ट शहरों के रूप में पहचान की गई है। एशियाई विकास बैंक ने जहां चेन्नई-विशाखापटनम कॉरीडोर की व्यवहार्यता रिपोर्ट पूरी कर ली है, वहीं महाराष्ट् में शेन्द्रा-बिडकिन जोन 2015 के मध्य से निविदाएं आमंत्रित करना शुरू कर देगा।

इसमें कोई शक नहीं कि मोदी सरकार तेज गति से काम कर रही है और जापान, खासकर जापान के व्यावसायिक समुदाय के साथ मोदी के पुराने संबंध लाभप्रद साबित हो रहे हैं। जब मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने काफी जापानी निवेश और टेक्निकल सहायता हासिल की थी। मोदी ने जापान को पहली महत्वपूर्ण द्विपक्षीय यात्रा के लिए चुना है। जापान से पहले, वह भूटान और नेपाल की द्विपक्षीय यात्रा कर चुके हैं, लेकिन उन यात्राओं का फोकस बिल्कुल अलग था। वहां भारत ने अपने प्रभाव का दायरा बढ़ाने के लिए निवेश और तकनीकी सहायता की पेशकश की थी।

भारत की शहरी आबादी के 2026 तक 36 फीसदी बढ़कर 59 करोड़ तक पहुंच जाने के आसार हैं। इस बढोतरी को समायोजित करने के लिए भारत को अगले दशक तक ही न्यूनतम 30 नए शहरों की जरूरत होगी। किसी स्मार्ट सिटी को किस चीज की जरूरत होती हैः भारी मात्रा में सरकारी निवेश, बुनियादी तथा आईटी ढांचे में नियमित निवेश, पीपीपी साझीदारों की दीर्घकालिक ढांचागत तथा ऋणपोषण, क्षेत्र के किसानों को स्व-निर्भर बनाने के लिए अधिकारसंपन्न करना जिससे कि वे शहरों की तरफ स्थानांतरण न कर सकें।

फिर अन्य संभावित स्मार्ट शहरों का आखिर क्या भविष्य होगा? क्या स्मार्ट शहरों का कभी निर्माण हो पाएगा? सरकार को इसे एक व्यवसाय की तरह लेना होगा जिसके लिए दीर्घकालिक रूप से भारी निवेश की जरूरत होगी। साथ ही, स्पष्ट रूप से उल्लेखित और निर्देशित अधिकार देने की भी जरूरत होगी, शायद उसी प्रकार के जैसे डीएमआरसी को भूमि अधिग्रहण और त्वरित मंजूरी के मामलों में मिले हुए हैं।

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