रूपे, बीमा वाले जन धन योजना के लाभ सहकारी बैंक खातों को भी होंगे सुलभ

ज्ञानेन्द्र केशरी, कार्यकारी संपादक, इनक्लुजन

वित्तीय सेवा विभाग में सचिव जी एस संधु स्कॉच ग्रुप द्वारा जन धन पर आयोजित एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत खोले जाने वाले खातों से जुड़े रूपे डेबिट कार्ड, बीमा तथा ओवरड्ाफ्ट सुविधाओं के लाभ सहकारी बैंकों द्वारा खोले गए खातों पर भी लागू होंगे। वित मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी ने गुरूवार को यह जानकारी दी।

गुड़गांव स्थित एक थिंकटैंक स्कॉच ग्रुप द्वारा जन धन पर आयोजित एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए भारत सरकार के वित्तीय सेवा विभाग में संयुक्त सचिव अनुराग जैन ने स्पष्ट किया कि जन धन योजना से जुड़ी सभी सुविधाएं सहकारी बैंकों द्वारा खोले गए खातों पर भी लागू होंगी।

उन्होंने यह भी कहा कि ये सुविधाएं पहले ही खोले जा चुके नो-फ्रिल खातों को दी जाएंगी और ऐसे खाताधारकों से जन धन योजना के तहत दूसरा खाता न खोलने की गुजारिश की।

श्री जैन जो जन धन योजना के मिशन निदेशक भी हैं, ने कहा कि यह मिशन केवल खाता खोलने से ही संबंधित नहीं है। हम एक कैशरहित समाज की ओर बढ़ना चाहते हैं और यह योजना इस चुनौती को पूरा करने में सहायक साबित होगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 28 अगस्त, 2014 को जन धन योजना के लांच के बाद इसपर आयोजित यह पहला बड़ा सम्मेलन था।

देश के स्वयं सहायता समूहों को जनधन खातों से कर्ज की सुविधाएं तुरंत मिलेंगी और उन्हें इसके लिए और इंतजार नहीं करना पड़ेगा। वित्त मंत्रालय के तहत आने वाले वित्तीय सेवा विभाग में सचिव जी एस संधु ने यह जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि सरकार ने बैंक मित्रों यानी बीसी मॉडल को व्यावहार्य बनाने का फैसला किया है और बैंकों से कहा है कि वे उनका 5000 रू. का मासिक पारिश्रमिक और अन्य ऋण सुविधाओं के साथ एक निर्धारित कार्यशील पूंजी तय कर दें।

संधु ने कहा कि प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत स्वयं सहायता समूह सबसे सम्मानित वर्ग हैं और उन्हें ऋण या ओवरड्ाफ्ट की सुविधाएं तत्काल मिलनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूह वित्तीय रूप से क्रियाशील समूह हैं और ब्याज की अदायगी के जरिये बैंकों को लाभ ही पहुंचाएंगे। उन्होंने बताया कि देश के 6 लाख गांवों में से केवल 45 हजार में ही बैंक शाखाओं की सुविधाएं उपलब्ध हैं, इसलिए इस योजना की सफलता के लिए शाखाओं के विस्तार के साथ साथ बैंक मित्र मॉडल को भी प्रोत्साहित किए जाने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि विस्तार करने और गहरी पैठ बनाने के लिए हम कोशिश कर रहे हैं कि बैंक मित्रों के लिए डाक घर, डाकिया, नागरिक सेवा केंद्रों और पीडीएस केन्द्रों जैसे एक जगह निर्धारित स्थानों की पहचान की जाए। इसके साथ-साथ, बेसिक हैंडसेट पर मोबाइल बैंकिंग को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दिया जा सकता है।

उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत अगला बड़ा कदम बचत पर फोकस के साथ सूक्ष्म बीमा योजनाओं को लागू करने का होगा।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए स्कॉच ग्रुप के चेयरमैन समीर कोचर ने कहा कि जन धन योजना का लक्ष्य सामाजिक तथा वित्तीय समावेश के अहम पहलुओं को पूरा करना है।

उन्होंने कहा कि स्कॉच ग्रुप पिछले 10 वर्षों से ऐसी योजना को बढ़ावा देता रहा है और इस योजना में हमारे बहुत से सुझावों को शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि वित्तीय समावेश का परिणाम निश्चित रूप से गरीबी के उन्मूलन के रूप में सामने आना चाहिए। अगर खातों में पैसे ही न हों तो इन्हें खोलने का क्या लाभ है?

भारतीय रिजर्व बैंक की कार्यकारी निदेशक डा. दीपाली पंत जोशी ने कहा कि जन धन योजना सबको अधिकारसंपन्न बनाने और पीछे छूट गए लोगों को विकास की मुख्यधारा में लाने की सरकार की कारगर योजना है।

उन्होंने कहा कि इसमें यह ज्यादा जरूरी है कि पहले सबसे निर्बल लोगों जिनमें महिलाएं, अनुसूचित जातियां और जनजातियां प्रमुख हैं को अवसर मिलना चाहिए।

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