मध्य प्रदेश में ई-गवर्नंस का दिख रहा है असर

शशि झा, सहायक संपादक, इनक्लुजन

मध्य प्रदेश में ई-गवर्नेंस का असर दिखने लगा है। सरकार एक पोर्टल स्थापित करने के जरिये सभी अहम जानकारियों एवं सभी विभागों के कार्यक्रमों को आम जन तक पहुंचाने का काम कर रही है जो काफी कारगर साबित हो रही है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ई-गवर्नेंस ने शासन को जनता के प्रति जबावदेह बनाया है। इंडिया 2.0 पर स्कॉच ग्रुप द्वारा आयोजित एक सम्मेलन के दौरान ये जानकारी सामने आई।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए मध्य प्रदेश सरकार की महिला एवं बाल विभाग मंत्री सुश्री माया सिंह ने कहा कि मध्य प्रदेश में महिला सशक्तिकरण राज्य सरकार की सात सबसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में है जिसके तहत सरकार ने बेटी बचाओ अभियान, लाडली योजना के बाद अब स्वागतम लक्ष्मी योजना की शुरूआत की है। इसमें जन्म से लेकर वृद्वावस्था तक महिलाओं को सम्मान देने पर जोर दिया गया है। इस कार्यक्रम के तहत महिलाओं के प्रति समाज को संवेदनशील बनाने, लोगों में नैतिक शिक्षा का प्रसार करने और सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि महिलाओं के प्रति समाज की मानसिकता में बदलाव लाने को तवज्जो दी गई है।

राज्य सरकार ने अभी हाल में शौर्या दल का गठन किया है जिसकी जिम्मेदारी खासकर, महिलाओं को शासकीय योजनाओं के बारे में जानकारी देनी है। साथ ही, उन्हें अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनाना भी है। महिलाओं के लिए राज्य सरकार की योजनाओं का लक्ष्य उनका सर्वागींण विकास करना है। इसके तहत महिलाओं को लघु स्तर के बहुत से प्रशिक्षण देने के बाद उन्हें नर्सिंग, ब्यूटीशियन या अन्य तकनीकी जानकारियां देने के बाद उन्हें संबंधित रोजगार दिलाने में मदद की जाती है।

मध्य प्रदेश में बाल विवाह जैसी कुरीतियों को रोकने के लिए लाडो अभियान की शुरूआत की गई है जिसका लाभ यह हुआ है कि छोटे उम्र के बच्चे, खासकर बच्चियां खुद सामने आकर बाल विवाह का विरोध करने लगी हैं। मप्र में लिंगानुपात में भी काफी कमी आई है।

सुश्री सिंह ने इस खूबसूरत आयोजन के लिए स्कॉच ग्रुप और खासकर, इसके चेयरमैन समीर कोचर की भूरि-भूरि प्रशंसा की और कहा कि यह एक बेहद उपयोगी मंच है जहां भाग लेने वाले एक दूसरे राज्यों, मंत्रालयों तथा विभागों द्वारा शुरू की गई अभिनव पहलों तथा नवाचारों के अनुभव का लाभ अपने अपने मंत्रालयों और विभागों को दे सकते है। ऐसे सम्मेलन न केवल लोगों का हौसला बढ़ाते हैं बल्कि यह सरकारी योजनाओं को लोगों तक पहुंचाने की एक बेहद कारगर पहल है।

स्कॉच डेवेलपमेंट फाउंडेशन के डिस्टिंगुइश्ड फेलो एम रामचंद्रन मानते हैं कि गुजरात के बाद मध्य प्रदेश में सर्वश्रेष्ठ प्रैक्टिस का अनुसरण बहुत तेजी से हो रहा है। मध्य प्रदेश शौचालयों के निर्माण में भी बहुत आगे है। स्कॉच डेवेलपमेंट फाउंडेशन द्वारा की गई पहलों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे उपयोगी सम्मेलनों के कारण राज्य सरकारों को फीडबैक मिलते हैं और वे नई पहलों से प्राप्त विचारों को अपने राज्यों में भी क्रियान्वित करने की कोशिश करते है।

दस्तकारी हाट समिति की अध्यक्षा जया जेटली का मानना है कि हमें ऐसी योजनाओं तथा सरकारी संगठनों की उपादेयता पर फिर से विचार करना होगा, जहां कोई भी उत्पादक काम नहीं होते। योजना आयोग जहां 20 लाख के काम के लिए 200 करोड़ की योजनाएं बना दी जाती हैं, का अब कोई औचित्य नहीं रह गया है। ग्रामीण महिलाओं की सहायता बहुत कम राशि से भी की जा सकती है। साथ ही, उन्हें मार्केटिंग आउटलेट की सुविधा दी जा सकती है जहां वे अपने कृषि, वन तथा समुद्री उत्पादों की बिक्री कर सकती हैं। नीतियों को लेकर केंद्र सरकार दिशानिर्देश दे सकती है लेकिन राज्य सरकारें अच्छा काम खुद भी कर सकती हैं। स्कॉच डेवेलपमेंट फाउंडेशन द्वारा की गई पहलों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे सम्मेलन विभिन्न विभागों के बीच एक सेतु का काम कर सकते हैं।

इससे पहले, स्कॉच ग्रुप के चेयरमैन समीर कोचर ने कहा कि 1991 से पहले भारत 1 की स्थिति में था, लेकिन इसे 2.0 तक ले जाने का हमारा लक्ष्य यह है कि हमारी प्रति व्यक्ति आय मौजूदा 1459 प्रति डॉलर से बढ़कर 2025 तक 9000 डॉलर तक पहुंच जाए। मैं पहले भी कहता रहा हूं कि केवल खाते खोलने से कुछ नहीं होगा, मुख्य मसला यह है कि उसमें से गरीबों के लिए क्या निकलता है? गरीबों को ऋण चाहिए, सुविधाएं चाहिए। प्रधानमंत्री की जन धन योजना में 5000 रूपये की ओवरड्राफ्ट की सुविधा भी दी गई है जो उनके लिहाज से छोटी रकम नहीं है। इससे वे गरीब अपना इलाज करा सकते हैं, छोटे स्तर पर मुर्गीपालन जैसे व्यवसाय शुरू कर सकते हैं। अब यह सुनिश्चित करने का वक्त आ गया है कि लक्षित वर्ग तक सरकार का कम से कम 85 पैसे पहुंचे, पहले की तरह 15 पैसे नहीं।

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