स्मार्ट शहरों के लिए जरूरी है प्रतिबद्धता

शंकर अग्रवाल, सचिव, शहरी विकास

शंकर अग्रवाल, सचिव, शहरी विकास

स्मार्ट शहरों की धारणा पर हम तभी से विचार कर रहे हैं जब से प्रधानमंत्री माननीय नरेन्द्र मोदी ने 100 स्मार्ट शहरों की घोषणा की है। मैं तो यह कहूंगा कि समाज तभी तरक्की करता है जब उसमें रहने वाले लोग सलाह मशविरे के तरीके से एक साथ आते हैं और एक समान लक्ष्य कि -उनका देश विकास करे और वहां शांति और समृद्धि आए- अर्जित करने के लिए मिलकर काम करते हैं। यह आवश्यक है कि हम ऐसे वातावरण का निर्माण करें जहां लोग समाज में मूल्य संवर्द्धन के लिए आगे आएं और आपस में विचारों का आदान प्रदान करें। एक स्मार्ट शहर के लिए यह पहला कदम होगा। दुनिया भर में लोग आजीविका की तलाश में गांवों से शहरी क्षेत्रों की तरफ प्रवास करते हैं। हमारा लक्ष्य केवल रोजगार का सृजन करना भर नहीं है बल्कि लोगों के जीवन स्तर को बेहतर करना भी है।

इसमें कोई संदेह नहीं कि हमारे गांवों और शहरों की स्वच्छता पर्याप्त नहीं है। स्वच्छ भारत अभियान का लक्ष्य 2019 तक एक स्वच्छ भारत का निर्माण करना है। मैं आपको बताता हूं कि इसके लिए बहुत अधिक प्रयास करने की जरूरत नहीं है, केवल लगन और प्रतिबद्धता ही बदलाव लाने के लिए काफी है। मानसिकता में बदलाव लाने के लिए प्रेरणा महत्वपूर्ण है।

अगर हम इस देश के प्रत्येक नागरिक को यह प्रेरित करने में सक्षम हो जाते हैं कि हम अपने घरों, पड़ोस, सार्वजनिक स्थानों की देखभाल कर सकें, यह सुनिश्चित कर सकें कि भारत खुले में शौच करने से मुक्त हो गया है और सार्वजनिक स्थानों पर कोई ठोस अपशिष्ट नहीं पड़ा है तो समझिए हमने आधी लड़ाई जीत ली है। हमें अपने पुरातात्विक स्थलों और पवित्र नगरों को भी स्वच्छ बनाने की जरूरत है जहां लोग मानसिक शांति के लिए जाते हैं लेकिन वहां की गंदगी देखकर उनका मन उचाट हो जाता है।

जेएनएनयूआरएम के तहत, हमने बड़े पैमाने पर 500 नगरों के शहरी नवीनीकरण का काम शुरू किया है। ये 500 नगर शहरी बुनियादी ढांचे, सड़कों, शहरी गतिशीलता, जल आपूर्ति, स्वच्छता और सीवरेज पर फोकस करेंगे।

यह बहुत बड़ी त्रासदी है कि आज हमारे शहर टूट रहे हैं और शहरी केन्द्रों में जीवन की गुणवत्ता में कमी आती जा रही है। हमारे युवाओं में उर्जा है और हमें इस क्षमता का लाभ उठाने की जरूरत है। इसके लिए चार चीजों की जरूरत है: पहला संस्थागत संरचना जिसका अर्थ है शासन की बेहतर गुणवत्ता। इसका अर्थ यह भी हुआ कि सभी सेवाओं की आपूर्ति इलेक्ट्रानिक तरीके से हो, सरकार की सभी प्रक्रियाएं ऑटोमेटेड अर्थात स्वचालित हो और कुछ क्षेत्रों को छोड़कर जहां सूचना संवेदनशील है, सारा कुछ पब्लिक डोमेन में यानी सभी लोगों की पहुंच के दायरे में हो।

दूसरा है भौतिक बुनियादी ढांचे का सृजन। आज की बेहद तेज गतिशीलता को देखते हुए अंडरपास, एलीवेटेड सड़कों तथा मास रैपिड ट्रांजिट सिस्टम का निर्माण भी आज की जरूरत बन गया है। पानी, सीवरेज, बिजली, स्वच्छता जैसी सुविधाएं की प्रतिबद्धता करनी होगी जिसके लिए प्री-पेड स्मार्ट कार्डों आदि का भी उपयोग किया जा सकता है।

तीसरा है सामाजिक ढांचा। इलेक्ट्ॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड का रखरखाव, टेली-मेडिसिन, ई-एजुकेशन आदि जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बना सकते हैं। निजी क्षेत्र इसमें अपनी भागीदारी करने और सहयोग देने के लिए तैयार है।

और अंत में आर्थिक बुनियादी ढांचा। अगर हम वास्तव में विकास करना और ज्यादा रोजगारों का सृजन करना चाहते हैं तो हमें अपनी युवा पीढ़ी को अच्छी गुणवत्ता वाले कौशलों से सुसज्जित करना होगा। हमें कौशल निर्माण के लिए ज्यादा संस्थानों की जरूरत होगी। और एक बार फिर यह काम सरकारी समर्थन के साथ ही किया जा सकता है।

इन सभी प्रकार के बुनियादी ढांचों को अगर हम आईसीटी के एक सतह के साथ कनेक्ट कर दें तो हम अपने नागरिकों को ज्यादा विकल्प दे सकेंगे और वे हमारे शहरों को ज्यादा स्मार्ट बना सकेंगे। हम शिक्षाविदों, टाउन प्लानरों और अन्य सभी साझीदारों से सीखने को इच्छुक हैं। सरकार इस विजन को साकार करने की दिशा में मिलजुल कर काम करने के लिए मार्गनिर्देशन करेगी।

comments powered by Disqus



Related Stories