‘बीमारू‘ मध्य प्रदेश अब लिख रहा भारत की विकास गाथा

राजकुमार रे, इनक्लुजन

एक दशक पहले तक मध्य प्रदेश की गिनती बिहार, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के साथ सबसे पिछड़े या ‘बीमारू‘ राज्यों में हुआ करती थी। लेकिन ऐसा लगता है कि शिवराज सिंह चौहान ने अभावों को अवसरों में बदल दिया है और मध्य प्रदेश की गिनती अब देश के सबसे तेज गति से बढ़ने वाले राज्यों में होने लगी है। जल्द ही यह राज्य सामाजिक और समावेशी विकास का पथ प्रदर्शक बन सकता है। इसे चौहान की विनम्रता कहिए या बदकिस्मती, मध्य प्रदेश अपने को प्रदर्शित करने के मामले में हमेशा परदे के भीतर छिपा रहा जबकि आर्थिक रूप से मजबूत गुजरात और महाराष्ट् जैसे राज्य हमेशा ही चकाचौंध में रहे। लेकिन अब मध्य प्रदेश के अच्छे दिन आ चुके हैं और जैसाकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विश्वास जताया है ‘मध्य प्रदेश भारत की विकास गाथा के पीछे मुख्य प्रेरक शक्ति बन जाएगा‘।

यहां यह कहना कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी कि मध्य प्रदेश का विकास पूरी तरह अनदेखा नहीं रहा है। स्कॉच ग्रुप ने हाल ही में गुजरात के साथ मध्य प्रदेश को सुशासन के लिए सर्वश्रेष्ठ राज्य का पुरस्कार दिया है। बहुत से लोग नहीं जानते होंगे कि मध्य प्रदेश पहला राज्य था जिसने सरकारी दान को पूरी तरह बदल दिया और प्रत्यक्ष नकद हस्तांतरण को क्रियान्वित किया। साथ ही, यह  सुनिश्चित किया कि एक एकल सामाजिक सुरक्षा-सह-डेबिट कार्ड मॉडल के जरिये वित्तीय समावेश हो। यह मॉडल पूरे शेष भारत में अनुसरण किए जाने लायक है। इसमें कोई आश्चर्य नही होना चाहिए कि ‘प्रधानमंत्री जन धन योजना‘ को आगे बढ़ाने में स्िरकय भागीदारी के लिए मध्य प्रदेश की सराहना खुद मोदी ने की। मध्य प्रदेश एक महीने के भीतर लगभग 36 लाख खातों को खोलने के जरिये जन धन योजना को क्रियान्वित करने में सबसे अग्रिम पंक्ति में रहा है।

और अब राज्य वैश्विक एवं घरेलू निवेशकों को आकर्षित करने का पूरा प्रयास कर रहा है। मोदी के भारत को एक मैन्यूफैक्चरिंग हब बनाने के वैश्विक अभियान का लाभ उठाते हुए चौहान ने अग्रणी उद्योगपतियों से ‘मेक इन इंडिया, मेक इन मध्य प्रदेश‘ की गुजारिश की है। संसाधनों तथा कुशल श्रमबल की प्रचुरता के साथ अपने राज्य को निवेश के लिए आदर्श राज्य की संज्ञा देते हुए मुख्यमंत्री ने निवेशकों के भरोसे पर पूरी तरह खरा उतरने का संकल्प किया।

मध्य प्रदेश ने न केवल सात वर्षों से दोहरे अंक की वृद्धि दर दर्ज कराई है बल्कि व्यवसायों के लिए भूमि की उपलब्धता और बिजली की प्रचुरता भी सुनिश्चित की है। और न केवल मैन्यूफैक्चरिंग में बल्कि चौहान ने मध्य प्रदेश को भारत का अगला आईटी मध्य प्रदेश हब बनाने का भी संकल्प लिया है। सरकार ने राज्य में पहले ही दो हार्डवेयर टेक्नोलॉजी पार्कों की शुरूआत कर दी है।

रक्षा क्षेत्र में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश की सीमा को बढ़ा कर 49 फीसदी करने की केंद्र सरकार की नीतिगत पहल पर त्वरित पहल करते हुए मध्य प्रदेश एक रक्षा मैन्यूफैक्चरिंग नीति लागू करने वाला पहला राज्य बन गया। केंद्र राज्य गठबंधन की दिशा में यह उल्लेखनीय कदम है जो प्रतिरक्षा में स्व-निर्भरता का सृजन करने में मदद करेगा। ऐसी पहलों की मोदी ने सराहना की है जिन्होंने एक दूसरे की ताकत का समन्वय करने के लिए केंद्र और राज्यों को एक साथ मिल कर काम करने की जरूरत को रेखांकित किया। उन्होंने कहा ‘ केंद्र और राज्यों को निश्चित रूप से एक दूसरे का पूरक बनना चाहिए। यह विकास की हमारी तलाश को बढ़ावा देगा। यह गणित के हिसाब से 1 जोड़ 1 बराबर 2 है लेकिन मैं ऐसे मॉडल की कल्पना कर रहा हूं जिसमें केंद्र और राज्य एक दूसरे के साथ मिल कर काम करें। इसका अर्थ यह हुआ कि केवल ये 2 संस्थान एक साथ मिल कर काम कर रहे हैं बल्कि उनके जुड़ने से यह 11 की संख्या बन रही है जो 2 से अधिक है‘।

मोदी का संदेश जोरदार और सुस्पष्ट है-जहां केंद्र सरकार व्यापक वृहद नीतियों का निर्माण करे, राज्यों को निश्चित रूप से ऐसी सक्षमकारी नीतियां बनाने की पहल करनी चाहिए जो उन नीतियों को क्रियान्वित करने में मदद करे। यहां, मध्य प्रदेश एक पथ प्रदर्शक बन कर उभरा है।

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