क्रोनी पूंजीवाद से दबावमुक्त सरकार में दिख रहा काम का जज्बा

समीर कोचर, प्रधान संपादक, इनक्लुजन एवं मोदीनोमिक्स

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भारत सरकार के सचिवों के साथ

मैं जब भी केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों से मिलता हूं, तो हमेशा उनसे एक ही सवाल पूछता हूं। मोदी सरकार के आने से क्या बदलाव आया है? लगभग एक स्वर से वे कहते हैं कि जो सबसे बड़ा बदलाव आया है वह यह कि अब सभी प्रकार के क्रोनी पूंजीवाद से संबंधित दबाव खत्म हो चुके हैं और अब वे वास्तव में महसूस करते हैं कि वे भारत के लिए काम कर रहे हैं न कि किसी एक व्यक्ति के लिए। अधिकारियों में अधिकारिता का एक नया हौसला दिख रहा है और अधिकांश अधिकारियों का यह विश्वास है कि सरकार उनके फैसलों का समर्थन करेगी और उन्हें उनकी वास्तविक गलतियों के लिए बेवजह फटकार नहीं पड़ेगी।

सरकार ने लालफीताशाही को खत्म करने और निर्णय लेने में पारदर्शिता लाने के लिए भारतीय प्रशासनिक सेवा (आचरण) नियमावली, 1968 में कई संशोधन किए हैं जो आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अधिकारियों के आचरण के लिए दिशानिर्देश निरूपित करते हैं। इस नियम में नौकरशाही को युक्तिसंगत बनाने और अधिकारियों के व्यक्तिगत आर्थिक या भौतिक लाभों के लिए अधिकारों के दुरूपयोग की संभावना को कम करने की बात की गई है।

सत्ता के गलियारों में बदलाव पूरी तरह दिख रहा है। फाइलें तेजी से निपटाई जा रही हैं। अधिकारी अब जरूरी फैसले लेने में डर नहीं रहे। नई प्रौद्योगिकी पर फोकस से भी प्रशासनिक प्रक्रिया में उल्लेखनीय बेहतरी लाने में मदद मिलेगी। हमारी मुख्य स्टोरी का फोकस शासन प्रणाली की स्थिति पर है। यह पूरे देश में सरकार के सभी स्तरों-केंद्र, राज्यों एवं स्थानीय निकायों में बेहतर प्रशासनिक पहलों को रेखांकित करती है।

बहरहाल, वर्तमान अधिकारियों से बेहतर प्रदर्शन कराने के मोदी जी के संकल्प की आड़ में कुछ भ्रष्ट अधिकारी भी घुस चुके हैं जो अभी भी पुराने घिसे-पिटे तरीके से ही काम कर रहे हैं। पुरानी व्यवस्था के विपरीत, इन नक्कारे अधिकारियों को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का धैर्य जल्द ही जबाव दे सकता है जो उन्हें कुछ योजनाओं को लेकर बेवजह सब्ज बाग दिखाने का वादा कर रहे हैं।

जहां सत्ता के दलालों, अर्थशास्त्रियों और दिल्ली के कुछ दूसरे षडयंत्रकारियों को दरवाजा दिखा दिया गया है, सरकार के भीतर क्षेत्रवार मुद्वों पर क्षमता अपर्याप्त है। अगर मोदी सरकार को वास्तव में व्यापक बदलाव लाना है तो सरकार को गुणी व्यक्तियों और अलग अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों के साथ जुड़ने की स्पष्ट आवश्यकता है।

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