श्रमेव जयते : राष्ट्र निर्माण का मोदी का नया मंत्र

आर के रे, इनक्लुजन

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नई दिल्ली में पंडित दीनदयाल उपाध्याय श्रमेव जयते योजना का शुभारंभ करते हुए

धरोहर के रूप में रोजगारविहीन विकास की विरासत पाना किसी भी नई सरकार के लिए बहुत खुशगवार बात नहीं हो सकती। लेकिन नरेन्द्र मोदी ने इस बड़ी चुनौती को कुछ अहम श्रम सुधारों के आगाज के एक अवसर के रूप में लिया है। ऐसे सुधार, जो न केवल श्रमिकों को खुश करेंगे बल्कि भारत के उद्योग जगत की जरूरतों को भी पूरी करेंगे, ऐसे कदम जो व्यवसाय करने में आने वाली बाधाओं को दूर करेंगे तथा अनुपालन समय एवं लागत में कमी लाएंगे। यह देखते हुए कि उद्योगपति अनुबंध श्रम को आसान बनाने के लिए औद्योगिक विवाद अधिनियम में संशोधन के रूप में ‘कड़े‘ श्रम सुधारों की मांग कर रहे थे जबकि ट्ेड यूनियन श्रमिकों के लिए बेहतर कामकाजी स्थितियों तथा सामाजिक सुऱक्षा की गुजारिश कर रहे थे, मोदी ने अपने नए मंत्र-श्रमेव जयते- के साथ एक संतुलनकारी काम किया है।

केंद्रीय श्रम मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने एक महीने पहले आयोजित स्कॉच सम्मेलन के दौरान इन सुधारों के जल्द लागू किए जाने के संकेत पहले ही दे दिए थे। तब उन्होंने कहा था कि सरकार लघु फैक्टरी अधिनियम, ऐसा व्यापक अधिनियम जो उन 14 श्रम कानूनों को जोड़ता है जिनका वर्तमान में एसएमई को अनुपालन करना पड़ता है, को लागू करने के लिए संसद के शीत सत्र के दौरान एक विधेयक लाएगी।

हालांकि आलोचक नई पहलों को लेकर अभी भी सवाल उठाएंगे, लेकिन यह अवश्य ध्यान में रखा जाना चाहिए कि श्रमेव जयते उन बड़े सुधारों की केवल एक पूर्व प्रस्तावना है जो फैक्टरी अधिनियम, प्रशिक्षु अधिनियम और श्रम कानूनों (कुछ कंपनियों द्वारा रिटर्न दाखिल किए जाने तथा रजिस्टरों के रखरखाव से छूट) अधिनियम में संशोधनों के रूप में आएंगे। ये सारे संसद में मंजूरी के लिए लंबित पड़े हैं। ये विधेयक वे कानूनी सुधार हैं जो फैक्टरियों में रोजगार को बढ़ावा देंगे, एसएमई को उनका व्यवसाय बढ़ाने में मदद करेंगे और व्यवसाय करने के माहौल को आसान तथा और बेहतर बनाने में मददगार साबित होंगे।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मोदी सरकार ने श्रम कानूनों को लेकर लंबे समय से चलते आ रहे गतिरोध को समाप्त कर दिया है और भारत की विकास गाथा में श्रमिकों की भूमिका को पुनर्परिभाषित किया है। मोदी ने 50 करोड़ मजदूरों को, जो अर्थव्यवस्था को दशक की सबसे बड़ी मंदी से बाहर निकालने के लिए खून पसीना बहा रहे हैं, प्रोत्साहित करते हुए कहा कि एक श्रम योगी पर्याप्त कौशलों एवं बेहतर कामकाजी स्थितियों में एक राष्ट्र योगी और एक राष्ट्र निर्माता बन सकता है। मोदी ने कहा कि अहम बात यह है कि श्रमेव जयते की पहल ‘मेक इन इंडिया‘ का एक अनिवार्य तत्व है क्योंकि वे बड़े पैमाने पर युवाओं के कौशल विकास के लिए रास्ता प्रशस्त करेंगे और आने वाले वर्षों में कुशल श्रमबल की वैश्विक जरूरतों की पूर्ति के लिए भारत के लिए एक अवसर का भी सृजन करेंगे।

प्रमुख श्रम योजना पंडित दीनदयाल उपाध्याय श्रमेव जयते कार्यक्रम में श्रम सुविधा पोर्टल, श्रम जांच योजना, प्रशिक्षु प्रोत्साहन योजना, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के लिए एक वैश्विक खाता संख्या यानी यूएएन और एक पुनर्निमित राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना शामिल है। हाल में लांच श्रम सुविधा पोर्टल, जो एक एकल ऑनलाइन फॉर्म के जरिये 16 श्रम कानूनों के अनुपालन को सुगम बनाता है, उद्योग, खासकर एसएमई की लंबे समय से चली आ रही  मांग थी। यही स्थिति पारदर्शी श्रम जांच योजना की है जो जांच के लिए इकाइयों का औचक चयन करेगी और इंस्पेक्टर राज की बेवजह प्रताड़ना को समाप्त कर बेहतर अनुपालन सुनिश्चित करेगी। इसमें कोई शक नहीं कि ये कदम औद्योगिक विवाद अधिनियम में संशोधन की तुलना में ज्यादा महत्वपूर्ण हैं जो खासकर, तब रोजगार वृद्धि में कमी आ रही है, श्रमिकों के हितों के खिलाफ जा सकते थे।

शायद सबसे अहम पहल प्रशिक्षु प्रोत्साहन योजना है जो नए लोगों के लिए कौशल विकास और रोजगार अवसरों को बढ़ाने में मदद करेंगे। रोजगारविहीन विकास की गुत्थी को सुलझाने में यह सहायक होगा। मोदी ने जैसे ही केंद्र की सत्ता संभाली, उसके तुरंत बाद सरकार ने पिछले दशक के रोजगारविहीन युग, जब जीडीपी 8 फीसदी की औसत सालाना दर से बढ़ रही थी जबकि रोजगार वृद्धि दर 1 फीसदी से कम थी, को समाप्त करने के लिए एक नई रोजगार नीति का अनावरण किया था। चिंता की बात यह है कि श्रम बल के केवल 10 फीसदी के पास ही कुछ तकनीकी कौशल है जिसमें से केवल एक चौथाई के पास औपचारिक तकनीकी ज्ञान है। इसकी वजह से देश की श्रम उत्पादकता चीन और ब्राजील जैसी अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में कम है। वैश्विक थिंक-टैंक द कांफ्रेंस बोर्ड द्वारा संग्रहित आंकड़ों के अनुसार, नियुक्त प्रति व्यक्ति जीडीपी के लिहाज से मापी गई श्रम उत्पादकता भारत में 2013 में 10,651 डॉलर थी जो चीन (19,666 डॉलर), ब्राजील (19,833 डॉलर) के मुकाबले कम और जर्मनी (79,896 डॉलर) एवं अमेरिका (114,914 डॉलर) जैसे विकसित देशों के मुकाबले तो और बेहद कम थी। जबतक कौशल विकास में तेजी नहीं आती, मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर एक सीमा से अधिक वृद्धि नहीं कर सकता और वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी नहीं हो सकता।

एक दूसरे ऐतिहासिक कदम के रूप में प्रधानमंत्री ने एक वैश्विक खाता संख्या यानी यूएएन के जरिये कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के सदस्यों के खातों की पोर्टेबिलिटी योजना का शुभारंभ किया जो किसी व्यक्ति के रोजगार के बदलते ही पीएफ ट्रांसफर को सुगम बनाएगा। यूएएन पीएफ के ट्रांसफर और निकासी में लगने वाली देरी और ईपीएफओ के पास पड़ी 27,000 करोड़ रूपये की बगैर दावों वाली राशि की समस्या का समाधान करेगा। मोदी ने पुनर्निमित राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना (आरएसबीवाई) के कारगर क्रियान्वयन की भी अपील की है जिससे कि स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत असंगठित क्षेत्र के ज्यादा श्रमिकों को शामिल किया जा सके।

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