14 अक्तूबर 2014
सरकार को मुद्रास्फीति का लक्ष्य निर्धारित करने की जरूरत

मुद्रास्फीति पर काबू पाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक की पिछले चार वर्षों से ब्याज दरों पर गिद्ध दृष्टि रही है। चुने हुए प्रतिनिधियों और सरकार के प्रतिरोध के बावजूद रिजर्व बैंक ने सख्त मौद्रिक नीति बरकरार रखी है। पर त्रासदी यह है कि इस गिद्ध दृष्टि का महंगाई पर कोई अनुकूल प्रभाव नहीं पड़ा है क्योंकि मुद्रास्फीति दर लगातार उंची बनी हुई है।

13 अक्तूबर 2014
कुछ पुरस्कार सराहना के लिए ही नहीं, वास्तविक भी होते हैं

यह गर्व की बात है कि भारत का नाम एक बार फिर से सम्मानित नोबल पुरस्कार विजेताओं की फेहरिस्त में शुमार है। व्यक्तिगत लिहाज से मदर टेरेसा ने 1979 में इसे प्राप्त किया था। अब यह कारनामा एक बाल अधिकार कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी ने कर दिखाया है जो नॉर्वे स्थित नोबल पुरस्कार समिति की पसंद बन कर उभरे।

10 अक्तूबर 2014
भारत में बैंकिंग के नए युग का सूत्रपात

भारतीय बैंकिंग प्रणाली वर्तमान में कुछ असामान्य संरचनात्मक बदलावों से गुजर रही है और स्वाभाविक रूप से जिस एक की चर्चा फिजां में ज्यादा गूंज रही है उसका नाम 'विभेदी बैंक' है। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन इस व्यावहारिक विचार के समर्थक बताये जाते हैं।

10 अक्तूबर 2014
‘बीमारू‘ मध्य प्रदेश अब लिख रहा भारत की विकास गाथा

एक दशक पहले तक मध्य प्रदेश की गिनती बिहार, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के साथ सबसे पिछड़े या ‘बीमारू‘ राज्यों में हुआ करती थी। लेकिन ऐसा लगता है कि शिवराज सिंह चौहान ने अभावों को अवसरों में बदल दिया है और मध्य प्रदेश की गिनती अब देश के सबसे तेज गति से बढ़ने वाले राज्यों में होने लगी है।

8 अक्तूबर 2014
टीआरपी की होड़ करा सकता है भारत-पाक में जंग

मोदी सरकार ने संप्रग 2 से विरासत में प्राप्त खराब आर्थिक स्थिति से उबरने, भारत को एक निवेश गंतव्य के रूप में विश्व के ध्यान केंद्र में लाने की कोशिश में अभी अभी अपने पांव जमाना शुरू ही किया है कि एक युद्ध जैसे हालात का खतरा मंडराने लगा है जो देश को एक अभूतपूर्व आर्थिक विषाद में डाल सकता है। अगर युद्ध का साया मंडराता है तो क्या कोई महसूस करता है कि इससे सबसे ज्यादा प्रभावित कौन होंगे- भारत के गरीब।

7 अक्तूबर, 2014
हैमलेट, हैदर और नेशनल इन्फार्मेटिक्स सेंटर

नेशनल इन्फार्मेटिक्स सेंटर यानी एनआईसी के संदर्भ में ‘हो या न हो‘ का यक्ष प्रश्न लंबे समय से उठाया जाता रहा है। जब इलेक्ट्रानिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग यानी डेयटी के सचिव यह कहते हैं कि एनआईसी के पास प्रधानमंत्री द्वारा परिकल्पित ‘डिजिटल इंडिया‘ को क्रियान्वित करने की क्षमता का एक अंश भी नहीं है तो इस वक्तव्य को या तो एनआईसी की एक आलोचना या फिर एनआईसी को जीवंत बनाने की एक योजना शुरू करने की पूर्व-भूमिका के रूप में देखा जा सकता है जो एनआईसी को एक ऐसे मजबूत सूचना प्रणाली संगठन के रूप में बदल देने में मदद करे जिसपर कोई भी देश गर्व महसूस करे।

6 अक्तूबर, 2014
बांग्लादेश से लें ‘स्वच्छ भारत‘ के सबक

भारत के 1.25 अरब लोगों में से आधे से ज्यादा खुले में शौच करते हैं और दुनिया में जितने लोग खुले में शौच करते हैं, उनमें से आधे से ज्यादा भारत में रहते हैं।

1 अक्तूबर, 2014
स्मार्ट शहरों के लिए जरूरी है प्रतिबद्धता

स्मार्ट शहरों की धारणा पर हम तभी से विचार कर रहे हैं जब से प्रधानमंत्री माननीय नरेन्द्र मोदी ने 100 स्मार्ट शहरों की घोषणा की है। मैं तो यह कहूंगा कि समाज तभी तरक्की करता है जब उसमें रहने वाले लोग सलाह मशविरे के तरीके से एक साथ आते हैं और एक समान लक्ष्य कि -उनका देश विकास करे और वहां शांति और समृद्धि आए- अर्जित करने के लिए मिलकर काम करते हैं। यह आवश्यक है कि हम ऐसे वातावरण का निर्माण करें जहां लोग समाज में मूल्य संवर्द्धन के लिए आगे आएं और आपस में विचारों का आदान प्रदान करें।

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